आज 14 सितम्बर है । हिन्दी दिवस । हिन्दी से जीने वाले इसे मनाने का रस्म पुरा करते हैं। जैसे की हिन्दी का जनाजा निकलने ही वाला है तो चलो अन्तिम वेला में इसका कुछ कुछ जयगान कर लें।
लेकिन मैं तो जनता हूँ की हमारी हिन्दी अब दौर रही है । किसी के सहारे नहीं बल्कि अपने बदौलत । बाज़ार इसके पीछे भाग रहा है। 60 कड़ोर मध्यम वर्ग के बीच अपनी जगह बनने की लिए ग्लोबल कंपनी हिन्दी में लटक रही है की मेरे भी सुन लो। तो भाई भड़ासियों क्या आप सोचते हैं की अपनी हिन्दी की जन्मदिवस की तरह मनाने से ही इसका प्रसार होगा या उन नौकरशाहों के दिमाग में इस बात को ठोककर घुसाने से की वे क्यों नहीं सभी काम काज को हिन्दीं में करने की प्राथमिकता देते हैं । हिन्दी का सर्व प्रसार तभी होगा जब हम सभी यह प्राण लें की आज से सब कम काज हिन्दी में दूसरा कुछ भी नहीं।
हम जर्मनी फ्रांस जापान चीन आदि देशों से सीख सकते हैं की बिना इंग्लिश को गले लगाये कैसे विकसित बने हैं। तो हम कब होंगे कामयाब ।
चलो प्राण लेते हैं की ...................
रेल फॉर्म रिज़र्वेशन हिन्दी में भरना है ।
बैंक से निकासी या जमा फॉर्म हिन्दी में भरना है।
मेट्रो शहर में रहने वाले लोगों आपको हिन्दी में बात करनी है
और सारे वादे करने की जिम्मेदारी भड़ासियों पर ...........
स्वास्थ्य संबंधी अनमोल बातें
9 years ago